सुंदरता हो न हो
सादगी होनी चाहिए
खुशबू हो न हो
महक होनी चाहिए
रिश्ता हो न हो
भावना होनी चाहिए
मुलाकात हो न हो
बात होनी चाहिए
यूं तो उलझे है सभी
अपनी उलझनों में
पर सुलझाने की कोशिश
हमेशा होनी चाहिएं ।
किसान दिवस पर विशेष देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का अहम योगदान है। कृषि ही देश की रीढ़ की हड्डी है। जब कृषि शब्द प्रयोग होता तो किसान शब्द की प्राथमिकता अपने आप बन जाती अन्यथा कृषि शब्द ही अधूरा है। किसान की धारणा व्यापक एंव विस्तृत है जिसे चंद किताबी लिखावटी पंक्तियों में व्यक्त नही किया जा सकता। आज देश की राजनीति ही किसान पे केंद्रित हो गयी किसान से शुरू होकर किसान पे ही खत्म हो गयी है। क्योंकि जब चुनावी मौसम के बादल प्रकट होते है तब हर जगह किसान शब्द छाया रहता है। राजनीतिक पार्टियों के प्रतिनिधि चुनाव के समय लंबे लंबे वादे सिर्फ किसान के नाम पर करते हैं परंतु जब किसान पर आपदा आती है तो वह सब कहीं भी दिखाई नहीं देते हैं। और किसानों की तकलीफों को अनदेखा कर देते हैं। कभी चंद दिनों में पूर्ण कर्ज माफी का लालच दिया जाता है कभी मालामाल होने के बड़े सपने दिखाए जाते है। सब कुछ मुफ्त देने की बड़ी बड़ी घोषणा होती है मानो भारत का किसान रातों रात अमीर हो जायेगा। सभी समस्याएं खत्म हो जायेगी जब चुनावी बादल छंट जाते है तब किसानों की दुःखों की पतझड़ को देखने कोई नही आता है। किं...
डॉ हेडगेवार पुण्यतिथि विशेष किसी भी परिस्थिति में समाज की सेवा के लिए, डटे रहने वाले स्वयंसेवियों का संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना, डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। आज डॉ. हेडगेवार जी की पुण्यतिथि है। समाज जीवन का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं है, जहां संघ का सेवा प्रकल्प न चल रहा हो वन्यप्रांत के वनवासी बहुल समाज से लेकर महानगरों तक में संघ, व्यक्ति निर्माण का कार्य कर रहा। परमवैभवशाली राष्ट्र’ इस सर्वोच्च / सर्वोत्तम ध्येय के लिए कटिबद्ध राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक युगपुरुष डॉ. केशवराव बलिराम हेडगेवार द्वारा 1925 को विजयदशमी के दिन नागपुर में अपने घर पर लगाई गई एक नन्हीं सी संघ-शाखा आज विश्व का सबसे बड़ा शक्तिशाली, अनुशासित एवं ध्येयनिष्ठ संगठन बन गया है। अपने बाल्यकाल से लेकर जीवन की अंतिम श्वास तक भारतवर्ष की स्वतंत्रता के लिए संघर्षरत रहने वाले डॉ. हेडगेवार ने 21 जून 1940 को पूर्ण स्वतंत्रता और अखंड भारत कहते कहते अपने प्राण छोड़े थे। एक शक्तिशाली राष्ट्रव्यापी हिन्दू संगठन के निर्माण के लिए स्वयं को तिल-तिल कर जलाने वाले डॉ. हेडगेवार वास्तव में युगपुरुष...
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