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हम भूल गए

जाने कितने झूले थे फाँसी पर, कितनो ने गोली खाई थी, क्यो झूठ बोलते हो साहब, कि चरखे से आजादी आई थी.... चरखा हरदम खामोश रहा, और अंत देश को बांट दिया.... लाखों बेघर, लाखो मर गए, जब गाँधी ने बं...